ham apane jiwan me bhahut menhat kiya lekin hame koe shafalta nahi mili ham kya kare. bachpan me skul chhut gaya fir maharast me aaya sutar ka kiya safal nahi huaa kya kare
ब्लाग blog न हुआ कोई सेक्सी लङकी sexy girl हो गयी . इधर कुछ दिनों से मुझे ब्लाग्स पर जाने में एक उलझन और भय सा लगने लगा..एक तो पिछ्ले कुछ दिनों में ब्लाग जगत का माहौल संसद भवन या आपस में द्वेशभाव रखने वाली राजनीतिक पार्टियों जैसा हो गया..इस बारे में कुछ कहने या विस्तार से बताने से कोई लाभ नहीं क्योंकि प्रत्यक्षम किं प्रमाणम..ब्लाग जगत इस समय सामना जैसी नीति पर काम कर रहा है but..sorry..ये बात सब के लिये नहीं कह रहा और न ही सब पर यह बात लागू होती है..खैर मैं जिन उलझनों की बात कर रहा हूँ वो इस बात को लेकर नहीं हैं बल्कि हटकर ही हैं वे उलझनें निम्न हैं ? 1 - जब मोबाइल फ़ोन चला था और आधा किलो वजन वाले मोबाइल आते थे तथा उस समय इनकमिंग काल चार्जेज ही छह रुपये प्रति मिनट थी मैंने बेहद शौक में इसके परिणाम ( दुश ) जाने बिना मोबाइल खरीद लिया..तब मुझे पता चला कि मोबाइल फ़ोन रखने से आप न तो ठीक से खाना खा सकते हैं..न सो सकते हैं..यहाँ तक कि टट्टी भी चैन से नहीं कर सकते ..अब ब्लाग में मोबाइल फ़ोन का क्या मतलब ? मतलब है मोबाइल ब्लाग जो मेरी उलझन का कारण है..आप अच्छे विचारों की तलाश में निकले हैं..गीत गजल कहानी..अध्यात्म की तलाश में निकले हैं और मान लीजिये कि ब्लाग (ऐसा) मिल भी गया.. 1 a - अभी रुक जाईये एक सिनेमा जैसा बङा पोस्टर खुल रहा है.. तब तक इंतजार करें..wait please..जैसे तैसे वो खुला तो फ़िर पूरी दुनिया का समय बताने बाला यन्त्र सामने आ गया . 2 - ब्लाग पर अभी ठीक से निगाह जमीं भी नहीं थी कि ब्लाग ने एक झटका सा मारा और ब्लाग का रंग ही बदल गया..जहाँ पङ रहे थे वो स्थान ही एक पल के लिये गायब सा हो गया...? 3 - ब्लाग की प्रष्ठभूमि का रंग (गहरा) और अक्षर का रंग ( font colour or size ) ऐसा है कि उसे पङने के लिये नासा की "अंतरिक्ष दूरबीन" की आवश्यकता महसूस हो रही है...? 4 - जैसे तैसे मैटर में मन लगाया तो अन्य आटोमेटिक गजट वजट ( पता नहीं क्या क्या ) लोड होने लगे...और जैसे रेलगाङी पास होने पर गेट बन्द ( crossing ) करके सङक वाहनों को रोक दिया जाता है ऐसे ही पेज जाम हो गया.. क्योंकि आयटम ( फ़ालतू ज्यादा ) इतने है उन्हें शो करने में कम्प्यूटर या इंटरनेट की कमर टूटी जा रही है...? 5 - अगर आप को रचना की झलक अच्छी लग रही है तो पहले इस फ़ोटो को देखे..फ़िर उस पर क्लिक करें और फ़िर पोस्ट खुलने का इंतजार करें..इतनी दिक्कत ताजमहल देखने या एयरपोर्ट की फ़ार्मेलिटीज में भी नहीं होती...? 6- अब मान लो इतनी मुश्किलों के बाद रो झींककर आपने रचना पढ भी ली ..और टिप्पणी का मन बनाया..तो पाप अप विंडो के खुलने का इंतजार करें जो अक्सर मुश्किल से खुलती है और दिस पेज नाट डिस्पलेयड का संदेश भी दिखा सकती है..इसके बाद शब्द पुष्टिकरण word verification तो बेहद बुरी बला ही है...अब मान लो टिप्पणी हो भी गयी तो वो ब्लागस्वामी की स्वीकृति ( moderation ) के बाद दिखेगी..पता नहीं देगा भी या नहीं क्या सारी मेहनत बेकार जायेगी..? ये ब्लाग बाहरी टिप्पणियों को अनुमति नहीं देता ( डायरी लिख लेते भाई ( या बहन ) ब्लाग लिखने के लिये क्या आपकी नानी कह गयीं थी ? sorry friends..अब मेरी बात ..बुरा मानने की बात नहीं है..आप एक पाठक की तरह खुद अपना ब्लाग खोलें और देखें कि आप क्या क्या उलझन महसूस करते हैं...यदि स्वयं अपनी कमियां न समझ पांय तो कुछ अन्य ब्लाग का अवलोकन करें और तुलना करें कि उसमें क्या बेहतर है..सबसे ज्यादा जो चीज मुझे परेशान करती है वो ब्लाग में बङे बङे अनावश्यक फ़ोटो होना ..ध्यान रखे कि जो ब्लाग देख रहा है वो इस समय इंटरनेट पर है और image देखना ही उसे अच्छा लगेगा तो इंटरनेट पर इतनी इमेज है कि आप पूरी जिन्दगी हजार ब्लाग बनाकर इमेज डालें तो भी उस तुलना में वो ऊँट के मुँह में जीरा ही होंगी .तो सही बात है न कि.. ब्लाग blog न हुआ कोई सेक्सी लङकी sexy girl हो गयी .
ब्लाग blog न हुआ कोई सेक्सी लङकी sexy girl हो गयी .
जवाब देंहटाएंइधर कुछ दिनों से मुझे ब्लाग्स पर जाने में एक उलझन और भय सा लगने लगा..एक
तो पिछ्ले कुछ दिनों में ब्लाग जगत का माहौल संसद भवन या आपस में द्वेशभाव
रखने वाली राजनीतिक पार्टियों जैसा हो गया..इस बारे में कुछ कहने या विस्तार
से बताने से कोई लाभ नहीं क्योंकि प्रत्यक्षम किं प्रमाणम..ब्लाग जगत इस समय
सामना जैसी नीति पर काम कर रहा है but..sorry..ये बात सब के लिये नहीं कह
रहा और न ही सब पर यह बात लागू होती है..खैर मैं जिन उलझनों की बात कर रहा हूँ
वो इस बात को लेकर नहीं हैं बल्कि हटकर ही हैं वे उलझनें निम्न हैं ?
1 - जब मोबाइल फ़ोन चला था और आधा किलो वजन वाले मोबाइल आते थे तथा उस
समय इनकमिंग काल चार्जेज ही छह रुपये प्रति मिनट थी मैंने बेहद शौक में इसके परिणाम ( दुश )
जाने बिना मोबाइल खरीद लिया..तब मुझे पता चला कि मोबाइल फ़ोन रखने से
आप न तो ठीक से खाना खा सकते हैं..न सो सकते हैं..यहाँ तक कि टट्टी भी चैन से नहीं
कर सकते ..अब ब्लाग में मोबाइल फ़ोन का क्या मतलब ? मतलब है मोबाइल ब्लाग
जो मेरी उलझन का कारण है..आप अच्छे विचारों की तलाश में निकले हैं..गीत गजल
कहानी..अध्यात्म की तलाश में निकले हैं और मान लीजिये कि ब्लाग (ऐसा) मिल भी
गया..
1 a - अभी रुक जाईये एक सिनेमा जैसा बङा पोस्टर खुल रहा है.. तब तक इंतजार
करें..wait please..जैसे तैसे वो खुला तो फ़िर पूरी दुनिया का समय बताने बाला यन्त्र
सामने आ गया .
2 - ब्लाग पर अभी ठीक से निगाह जमीं भी नहीं थी कि ब्लाग ने एक झटका सा मारा
और ब्लाग का रंग ही बदल गया..जहाँ पङ रहे थे वो स्थान ही एक पल के लिये गायब
सा हो गया...?
3 - ब्लाग की प्रष्ठभूमि का रंग (गहरा) और अक्षर का रंग ( font colour or size )
ऐसा है कि उसे पङने के लिये नासा की "अंतरिक्ष दूरबीन" की आवश्यकता महसूस हो
रही है...?
4 - जैसे तैसे मैटर में मन लगाया तो अन्य आटोमेटिक गजट वजट ( पता नहीं क्या क्या )
लोड होने लगे...और जैसे रेलगाङी पास होने पर गेट बन्द ( crossing ) करके सङक वाहनों को रोक
दिया जाता है ऐसे ही पेज जाम हो गया.. क्योंकि आयटम ( फ़ालतू ज्यादा ) इतने है उन्हें
शो करने में कम्प्यूटर या इंटरनेट की कमर टूटी जा रही है...?
5 - अगर आप को रचना की झलक अच्छी लग रही है तो पहले इस फ़ोटो को देखे..फ़िर उस पर
क्लिक करें और फ़िर पोस्ट खुलने का इंतजार करें..इतनी दिक्कत ताजमहल देखने या एयरपोर्ट
की फ़ार्मेलिटीज में भी नहीं होती...?
6- अब मान लो इतनी मुश्किलों के बाद रो झींककर आपने रचना पढ भी ली ..और टिप्पणी
का मन बनाया..तो पाप अप विंडो के खुलने का इंतजार करें जो अक्सर मुश्किल से खुलती
है और दिस पेज नाट डिस्पलेयड का संदेश भी दिखा सकती है..इसके बाद शब्द पुष्टिकरण
word verification तो बेहद बुरी बला ही है...अब मान लो टिप्पणी हो भी गयी तो वो
ब्लागस्वामी की स्वीकृति ( moderation ) के बाद दिखेगी..पता नहीं देगा भी या नहीं
क्या सारी मेहनत बेकार जायेगी..? ये ब्लाग बाहरी टिप्पणियों को अनुमति नहीं देता
( डायरी लिख लेते भाई ( या बहन ) ब्लाग लिखने के लिये क्या आपकी नानी कह गयीं थी ?
sorry friends..अब मेरी बात ..बुरा मानने की बात नहीं है..आप एक पाठक की तरह खुद
अपना ब्लाग खोलें और देखें कि आप क्या क्या उलझन महसूस करते हैं...यदि स्वयं अपनी
कमियां न समझ पांय तो कुछ अन्य ब्लाग का अवलोकन करें और तुलना करें कि उसमें
क्या बेहतर है..सबसे ज्यादा जो चीज मुझे परेशान करती है वो ब्लाग में बङे बङे अनावश्यक
फ़ोटो होना ..ध्यान रखे कि जो ब्लाग देख रहा है वो इस समय इंटरनेट पर है और image
देखना ही उसे अच्छा लगेगा तो इंटरनेट पर इतनी इमेज है कि आप पूरी जिन्दगी हजार
ब्लाग बनाकर इमेज डालें तो भी उस तुलना में वो ऊँट के मुँह में जीरा ही होंगी .तो सही बात है न
कि.. ब्लाग blog न हुआ कोई सेक्सी लङकी sexy girl हो गयी .